कल्पेश्वर वन कि कहानी

 



कल्पेश्वर वन भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित है और इसकी कहानी एक धार्मिक और प्राकृतिक महत्व की ओर इशारा करती है।


कल्पेश्वर वन का नाम उसके प्रमुख मंदिर, "कल्पेश्वर महादेव मंदिर," से जुड़ा है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसका महत्व हिन्दू धर्म में बहुत ऊँचा माना जाता है।


कहानी के अनुसार, कल्पेश्वर मंदिर का स्थापना काल्पेश्वर वन क्षेत्र में हुआ था। लोग मानते हैं कि यहां के वन्यजीवों के साथ धार्मिक सम्बन्ध बहुत प्राचीन समय से हैं।


इस जंगल का मनोहारी प्राकृतिक सौंदर्य और शांति के लिए प्रसिद्ध है। कल्पेश्वर वन में घने वनस्पति, प्राकृतिक झीलें, और वन्यजीवों का आवास होता है। यहां के आदिवासी जनजातियां इस वन के साथ जड़े हुए हैं और उनका जीवन इस वन के साथ अटूट रिश्ते की ओर इशारा करता है।


कल्पेश्वर वन विशेष रूप से धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है, जो लोगों को शांति, स्थिरता, और आध्यात्मिकता का अनुभव करने का मौका देता है।

चुड़ैल का बदला: रात की रानी की कहानी

**चुड़ैल का बदला: रात की रानी की कहानी**

**प्रस्तावना:**
यह कहानी एक प्राचीन गाँव "चंदनपुर" की है, जो एक प्यारी लड़की, रात की रानी, के लिए जानी जाती है, जिसे चुड़ैलों के साथ सम्बंध थे। एक नया नोवेल, "चुड़ैल का बदला," इस कहानी को निम्नलिखित रूप में प्रस्तुत करता है:

**कहानी:**
**भूमिका:** चंदनपुर गाँव में एक सुंदर लड़की नामक "रात की रानी" बचपन से ही अद्वितीय थी। उसकी आँखों में वो खास ब्लू रंग की चमक थी जो उसे अद्वितीय बनाती थी।

**संकेत:** एक दिन, चंदनपुर में एक संकेत मिलता है कि एक बड़ी चुड़ैल शक्ति प्राप्त करने के लिए वापस आ गई है और उसका निशाना रात की रानी पर है।

**यात्रा और साजिश:** रात की रानी, अपने प्यारे गाँव की सुरक्षा के लिए, एक आद्यत्मिक यात्रा पर निकलती है। वह चुड़ैल के सामने अपने अद्वितीय गुणों का प्रयोग करती है और एक बड़ा राज खोलती है, जिसका सम्बंध चुड़ैल के पिछले जन्म से है।

**संघर्ष और समाधान:** रात की रानी और चुड़ैल के बीच महायुद्ध होता है, जिसमें प्यार और शक्ति के बीच की टक्कर का बदला लिया जाता है।

**निष्कर्ष:** क्या रात की रानी चुड़ैल से बदला लेती है और अपने गाँव को बचा पाती है? या क्या उसका प्यार और साहस उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं? "चुड़ैल का बदला" एक रोमांटिक और आद्यत्मिक यात्रा की कहानी है, जिसमें दिल की बातें और साहस का मेल होता है।

फूल

फूल रात के आंधेरे में एक पुराने और डरावने हवेली के सामने खिल रहा था। हवेली का नाम "भूतिया महल" था, और यह आस-पास के गाँववालों के लिए एक खौफ का साया बन गया था। लोग कहते थे कि वहाँ रात के समय अजीब-अजीब आवाजें आती थीं और अजनबी आत्माओं की छायाएँ घूमती रहती थीं।

इस भूतिया महल की दिलचस्प कहानी है, जिसमें एक युवक नामक "रवि" का सामर्थ्य था कि वह अपने दोस्तों के साथ इसे एक रात जाएंगे और इसके रहस्य को सुलझाएंगे।

रवि और उसके दोस्तों ने अपना सामग्री साथ लिया और भूतिया महल की ओर बढ़ते हुए एक अजीब और बेहद डरावने माहौल में पहुंचे। वे हवेली के द्वार पर खड़े हो गए और वहाँ एक पुराना और अरबों साल पुराना कुंड है जिसमें एक सदी पहले हुई एक रहस्यमय हत्या की घटना की गई थी।

रवि और उसके दोस्त उस कुंड के पास पहुंचे और वहाँ अपनी फ्लैशलाइट्स की मदद से नीचे झाँकने लगे। वे देखते हैं कि कुंड के अंदर कुछ तरह की अजीब चीज छिपी है। रवि ने धीरे से उस चीज को उठाया और देखा कि वह एक पुराना किताब है।

किताब के पन्नों पर अजीब-अजीब मंत्र और चित्र थे, जो कुछ अजनबी जगह की प्रतिमाओं के साथ थे। जैसे ही रवि ने किताब को खोला, वह खुद को एक अजीब समय की भास्कर पाया, जब वही कुंड उसी दशा में हुआ था जब हत्या हुई थी। रवि ने देखा कि वही अरबों साल पुरानी हत्या के दृश्य हो रहे थे।

धीरे-धीरे, वह देखते हैं कि हत्या का आरोपी वो खुद है, लेकिन उसका चेहरा पुराने समय की वजह से मिट चुका है। उसने अपने दोस्तों के साथ हत्या की वजह और सच्चाई का पता लगाने का फैसला किया।

वे धीरे-धीरे हत्या के पीछे के रहस्य को सुलझते हैं, और उन्होंने वह दुखद और भयंकर सच्चाई खोल दी कि वो बिना जाने ही भूतिया महल में फंस गए थे, और उन्होंने खुद को एक आत्मा के रूप में बाँध लिया था।

यह उपन्यास फूल के फूल के भयानक और रहस्यमय दुनिया को छूने का प्रयास करता है, जब आत्मा और अजीब घटनाएँ अचानक आपके आस-पास हो जाती हैं। क्या रवि और उसके दोस्त इस भूतिया महल से बाहर निकल पाएंगे, या वह वहीं फंस जाएंगे और भूतिया महल की आत्मा के साथ एक अजीब खेल में शामिल हो जाएंगे?


फूल का भूत

प्रमोद, शीतलागढ़ के एक छोटे से गाँव का लड़का, बगीचे में काम करने के लिए रोज़ बुलाया जाता था। उसे अजीब चीजें महसूस होतीं, खासकर रात के समय। उसने सुना था कि वहाँ रात को कुछ आवाजें और चीखें आतीं हैं, लेकिन कोई नहीं देखता।एक रात, प्रमोद बगीचे में रात बिताने का निर्णय लेता है। जब वह अकेला होता है, तो वह अजीब दिशाओं से आवाज़ें सुनता है और एक पुराने पीपल के पेड़ के पास जाता है। वहाँ वह एक अत्यंत डरावनी छाया के साथ एक अदृश्य शव का पता लगाता है।इसके बाद, प्रमोद की जीवन में घटनाएँ और संघटनाएँ बदल जाती हैं, और वह बगीचे के रहस्य को सुलझाने का प्रयास करता है। क्या प्रमोद शीतलागढ़ के इस हॉरर से भरपूर रहस्य को हल कर पाएंगे? यह उपन्यास उसकी कहानी को बताता है, जो हॉरर और सस्पेंस से भरा हुआ है।



शीतलागढ़ की रातें

प्रमोद, शीतलागढ़ के एक छोटे से गाँव का लड़का, बगीचे में काम करने के लिए रोज़ बुलाया जाता था। उसे अजीब चीजें महसूस होतीं, खासकर रात के समय। उसने सुना था कि वहाँ रात को कुछ आवाजें और चीखें आतीं हैं, लेकिन कोई नहीं देखता।एक रात, प्रमोद बगीचे में रात बिताने का निर्णय लेता है। जब वह अकेला होता है, तो वह अजीब दिशाओं से आवाज़ें सुनता है और एक पुराने पीपल के पेड़ के पास जाता है। वहाँ वह एक अत्यंत डरावनी छाया के साथ एक अदृश्य शव का पता लगाता है।इसके बाद, प्रमोद की जीवन में घटनाएँ और संघटनाएँ बदल जाती हैं, और वह बगीचे के रहस्य को सुलझाने का प्रयास करता है। क्या प्रमोद शीतलागढ़ के इस हॉरर से भरपूर रहस्य को हल कर पाएंगे? यह उपन्यास उसकी कहानी को बताता है, जो हॉरर और सस्पेंस से भरा हुआ है।

एक थी डायन कहानी

एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में एक महिला रहती थी, जिसे लोग "डायन" कहकर डराते थे। वह सचमुच में किसी डायन जैसी नहीं थी, लेकिन लोगों की भ्रमित धारणाओं के कारण वह अकेली रहती थी और उसे समाज से बाहर कर दिया था।

एक दिन, एक युवक गांव में आया और उसने डायन के बारे में सबकुछ सुना। वह निर्धारित किया कि वह सच्चाई को जानें बिना किसी कड़वी धारणा के उस महिला से मिलेगा।

जब वह उस महिला से मिला, तो उसने देखा कि वह बहुत ही सामान्य और सधारण महिला है, जो आवाजाहीन थी और विचलित दिखती थी। वह उसके साथ बात करने लगा और जाना कि वह कैसे इस दुर्भाग्य से गुज़र रही थी।

युवक ने गांववालों को वास्तविकता बताई और उन्हें यह समझाया कि डायन केवल एक मिथक है। उसने समुदाय को एक साथ आने के लिए प्रोत्साहित किया और उन्हें उस महिला के साथ मिलकर एक सशक्त गांव बनाने में मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया।

इसके परिणामस्वरूप, गांववालों ने अपने धारणाओं को बदल दिया और समृद्धि और विकास की ओर बढ़ने के लिए मिलकर काम किया। डायन के खिलाफ जो डर था, वह दूर हो गया और एक नया आदर्श समाज बना।

कर्ण पिसाजनी भविष्य नहीं देख सकतीं

आज के वैज्ञानिक युग में भूत-प्रेत और पारलौकिक शक्तियों से जुड़ी घटनाओं पर कोई विश्वास नहीं करता. ऐसी घटनाओं के पीछे विज्ञान और तर्क ज्ञान को आधार बताकर भले ही ऊपरी तौर पर इनके पीछे छिपी काली सच्चाई से पल्ला झाड़ लिया जाता हो लेकिन हकीकत टालना या उसे नजरअंदाज करना उतना ही फिजूल है, जितना देखी हुई को अनदेखा कर देना.क्या आपका सामना किसी ऐसे इंसान से हुआ है जिसने पहली ही मुलाकात में आपको वो सब बता दिया हो जिसे आप या आपके करीबी लोग जानते हैं? आपके घर में कितने लोग हैं, कौन क्या-क्या करता है, आपकी किससे बनती है और कौन आपका दुश्मन है, यह सब आपको उस व्यक्ति ने सिर्फ आपका चेहरा देखकर ही बता दिया हो?अगर वास्तव में आपका ऐसे किसी भी व्यक्ति से सामना हुआ है तो उसकी इस जानकारी के चलते आपको लगा होगा या तो वो कोई धोखेबाज है या फिर वह कोई महान सिद्ध पुरुष है. अगर उस व्यक्ति के लिए आपके भीतर ऐसी धारणा आई है तो हम आपको बता दें कि उस व्यक्ति के पास वो शक्ति है जो उसे दुनिया की कोई भी जानकारी एक क्षण में प्रदान कर सकती है. यह तंत्र साधना का वो कमाल है जिसे कड़ी सिद्धि द्वारा प्राप्त किया जा सकता है.

कर्ण पिशाचिनी सिद्धि, यह वो तंत्र विद्या है जिसमें आपके हर सवाल का जवाब एक अलौकिक ताकत आपके कान में आकर दे जाती है, वह जवाब सिर्फ आपको ही सुनाई देता है. इस विद्या को कर्ण पिशाचिनी विद्या के अलावा पिशाच विद्या या नेक्रेमेंसी भी कहा जाता है. इस सिद्धि को प्राप्त करने के बाद आप अलौकिक ताकतों से जब चाहे संपर्क साध सकते हैं.

यह साधना बेहद कठिन है लेकिन अगर एक बार इस सिद्धि को प्राप्त कर लिया जाए तो आप अपने मरे हुए परिजनों, जिनकी आत्माएं भटक रही हैं, से जब चाहे बात कर सकते


इस सिद्धि को प्राप्त करने के बाद साधक वशीकरण एवं पाश मंत्र के जरिए एक प्रेतनी का स्वामी बन जाता है और वह प्रेतनी से हर जानकारी पल भर में उगलवा सकता है. वह प्रेतनी उस साधक के कान में ही वास करती है इसीलिए उसे कर्ण पिशाचिनी कहा जाता है.


यह प्रेतनी उस साधक को आपके बारे में हर उस घटना से रूबरू करवा सकती है, जो या तो आपके साथ हो चुकी है या तो वर्तमान में हो रही है क्योंकि कर्ण पिशाचिनी भविष्य नहीं बता सकती. उसकी पहुंच सिर्फ अतीत और वर्तमान तक ही होती है.

आवाजों का रहस्य

वैसे मै भूत प्रेतों में विश्वास नहीं करता हु लेकिन उस दिन जो मेरे साथ हुआ उसको देखकर मुझे इस किस्से को आपके समक्ष रखना चाहता हु | एक रात वहा पर हम परिवार के पांच सदस्य मै , मेरी दादी , चाचा ,चाची और मेरा चचेरा भाई थे और मै सोफे पे सो रहा था और दादी से बाते कर रहा था और चाचा ,चाची और मेरा चचेरा भाई उपरी माले पर बने रूम में सो रहे थे |  
मैंने फिर से तेज आवाज में उसका नाम पुकारा और इस बार भी वोही आवाज़ दुगुनी तेज सुनाई दे रही थी | जब मैंने इसे बार बार सूना तो मेने बिना डरे उस अंधेरी गैलरी में जाने की सोची और यह देखकर हक्का बक्का रह गया कि वहा कोई भी मौजूद नहीं था | अब मुझे थोडा डर लगने लगा | मै जल्दी से वहा से भागा और मेरे कमरे से होते हुए आकाश के कमरे में गया और देखा कि वो तो सो रहा था |  


रात के 10:30 बजे थे तभी मैंने अचानक देखा कि किसी ने गैलरी की बिजली बंद कर दी | जिस रूम में हम बैठे थे वो गैलरी से थोडा दूर था और मुझे वहा से गैलरी में कुछ नहीं दिख रहा था | यह पक्का करने के लिए मैंने अपने चचेरे भाई आकाशको आवाज़ दी और दुसरी तरफ मुझे हां की आवाज़ सुनाई दी | मै चौंक गया कि वो वहा कैसे पहुच गया क्यूंकि उस गैलरी तक सिर्फ हमारे रूम से ही जाने का रास्ता है |  

मैंने उसी समय उसे जगाया और गैलरी वाली घटना बताई | आकाश ने कहा कि मै तो सो रहा था और मै नीचे तो आया ही नहीं मै यह सब सुनकर डर गया कि यह सब कैसे हो गया ?? क्यूंकि कोई चोर भी हमारे कमरे में घुसे बिना उस गैलरी तक नहीं पहुच सकता | मैंने सोचा ये सब मेरे साथ ही हुआ लेकिन अगले दिन चाचा ने बताया कि उन्हें भी कभी आवाज़े सुनाई देती है लेकिन वो ध्यान नहीं देते है | कुछ महीनो बाद उन्होंने भी वो घर बेचकर दूसरा नया घर ले लिया |

भारत में कितने प्रकार के भुत मिलते हैं

भारतीय लोककथाओं और परंपराओं में विभिन्न प्रकार के भूत-प्रेत, असरी, और आत्मा से जुड़े कई प्रकार के भूत होते हैं। यह कुछ प्रमुख प्रकार के भूत हैं:

1. **चुड़ैल**: चुड़ैल एक प्रकार की भूतिया औरत होती है जो रात के समय लोगों के पास आती है और उन्हें भ्रमित करती है।

2. **डाकिनी**: डाकिनी भी एक प्रकार की भूतिया स्त्री होती है, जो बच्चों को बहलाने का काम करती है और फिर उन्हें अपने बलम से खा जाती है।

3. **चुड़ाईल**: चुड़ाईल एक प्रकार की प्श्यकाशी भूत होती है, जो अपनी भूतिया साथियों के साथ लोगों को बेहलती है।

4. **पिशाच**: पिशाच भूत पुराने संस्कृति में मिलते हैं, और ये अधिकतर नकरात्मक प्रवृत्ति के होते हैं।

5. **आत्मा**: आत्मा अमर और अदृश्य होती है, और यह लोगों की जानकारी के बिना उनके पास आ सकती है।

6. **प्रेत**: प्रेत भूत अवश्यम्बिक रूप से दुखी होते हैं और वे अपनी दुख भरी कहानियों में लोगों को बताते हैं।

ये केवल कुछ प्रकार के भूत हैं, और भारत के विभिन्न क्षेत्रों में और भी अनगिनत भूत-प्रेत कथाएँ और परंपराएँ हैं। ये कथाएँ अक्सर स्थानीय संस्कृति और लोककथाओं से जुड़ी होती हैं और भारतीय जीवन में गहरा सांस्कृतिक महत्व रखती हैं।

रास्ते का भयंकर साया

एक बार की बात है, एक गाँव के पास एक लांबा और अंधेरा जंगल था। यह जंगल गाँव को शहर से जोड़ने वाले एक सुनसान सड़क के किनारे था, जिसका नाम "रास्ता भूत" था।

गाँववाले रात के समय उस सड़क पर नहीं जाते थे, क्योंकि कहानियों में कहा जाता था कि रात को रास्ते पर एक भयंकर साया घूमता रहता है। लोग कहते थे कि वह साया किसी को अपने जाल में फंसा देता है और फिर उसके साथ कुछ अनजाने और भयंकर चीखते-पुकारते साबित होते हैं।

एक दिन, गाँव के एक बहादुर लड़के नामक अर्जुन ने निश्चय किया कि वह इस रास्ते पर जाकर देखेगा कि यह साया सचमुच में मौजूद है या नहीं।

रात के समय, अर्जुन ने एक बड़ा बतखाना टॉर्च लिया और सड़क पर बढ़ा। सड़क पर पहुंचने पर उसने कुछ दिव्य चिन्हों को देखा और एक विशाल बर्फी साया के रूप में दिखाई दिया।

अर्जुन डरने का नाम नहीं लेता और धीरे-धीरे साया की ओर बढ़ता है। जब वह साया के पास पहुँचता है, तो वह देखता है कि वह साया एक वृक्ष की छाया में है और वह वृक्ष की छाया से आराम से सो रहा था।

इसके बाद, गाँव में फैले डर के बारे में एक सच्चाई का पता चलता है कि यह साया सचमुच में डरावना नहीं था, और गाँववाले अब रात को भी उस सड़क पर जा सकते हैं बिना किसी चिंता के।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें अकेले दरावनी कहानियों और अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए, और हमें खुद जाकर सच्चाई की जाँच करनी चाहिए।

एक चुड़ैल डाकिन

एक जंगल में एक बड़ी ही भयंकर चुड़ैल रहती थी, जिसका नाम डाकिना था। डाकिना विलापुनी और अहंकारी थी, और वह अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करके लोगों को डराने का आनंद लेती थी।

एक दिन, डाकिना ने जंगल में एक साधू को देखा, जो अपनी तपस्या कर रहा था। डाकिना को विचार आया कि वह साधू उसकी शक्तियों को भंग कर सकता है, और उसने साधू के पास जाकर उसके सामने आवाज किया।

साधू ने डाकिना की बातों को ध्यान से सुना और फिर उसे एक उपदेश दिया, "डाकिना, तुम्हें अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने की आवश्यकता नहीं है। इन्हें सच्चे कार्यों में लगाओ और लोगों की मदद करो।"

डाकिना ने साधू के उपदेश का पालन किया और अपनी भयंकर शक्तियों का उपयोग सही मार्ग पर करने लगी। वह अब जंगल के लोगों की समस्याओं का समाधान करने में मदद करती और उनका दुख हरती।

डाकिना के सहयोग से, जंगल का माहौल बदल गया और वह अब लोगों की सच्ची रक्षिका बन गई। उसका नाम अब भी चुड़ैल था, लेकिन अब वह लोगों के दिलों में डर की बजाय आशीर्वाद और सहानुभूति की प्रतीति होती थी।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि शक्ति का सच्चा मतलब दूसरों की मदद करने में है, और हमें उसे सही तरीके से उपयोग करना चाहिए।

डर से जीत

एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में जो कि एक जंगल के किनारे था, एक डरपोक लड़का नामक राजू रहता था। राजू का दिन अपने डर से गुजरता था। उसके साथी गांववाले हमेशा मजाक उड़ाते और उसे 'भूतिया राजू' कहकर हंसते रहते थे।

एक दिन, राजू ने गांव के पुराने पुस्तकालय के बारे में सुना। वहां पर एक पुस्तक होती थी, जिसमें जंगल की पुरानी कहानियाँ लिखी होती थीं। राजू की रुचि पुस्तकों में थी, लेकिन उसका डर उसे उस पुस्तकालय में जाने से रोक रहा था।

एक दिन, राजू ने अपने दोस्तों से सहायता मांगी, और उन्होंने उसे पुस्तकालय ले जाने में मदद की। वहां पर वे एक पुरानी किताब ढूंढने में लग गए, और वो किताब उन्होंने खोज ली। जब वे किताब खोलकर पढ़ने लगे, तो वह कहानी थी जो गांववालों के बीच में बड़े ही प्रसिद्ध थी।

कहानी के अनुसार, जंगल में एक पुराना और भूतिया हवेली था, जिसमें चमकदार जेवरात छिपे थे। इसे ढूंढ़ने का ख्वाब सभी गांववालों का था, लेकिन कोई भी वहां जाने का डरता था।

राजू और उसके दोस्त ने उस हवेली की खोज करने का निश्चय किया। वे रात के समय हवेली की ओर बढ़े और वहां पहुंचकर देखा कि हवेली में कुछ अद्वितीय चीजें हैं, जिन्होंने उन्हें हैरान कर दिया।

वे जेवरातों की खोज में अपने डर को पार करके अगले सुबह गांव लौटे और उन्होंने अपनी कहानी साझा की। गांववालों ने उनके साहस की सराहना की और साथ में हवेली की खोज में निकले। वे जेवरातों को पाकर गर्वित हुए और गांव को धन से भर दिया।

इस कहानी से राजू ने सिखा कि डर को पार करने से ही सफलता मिलती है और आगे बढ़ने का सही मौका मिलता है। वह अब डर के बजाय उसे मुकाबला करने का साहस रखता था, और गांव के लिए वह एक अद्भुत गतिमान बन गया।

भुत कि दोस्ती

एक बार की बात है, एक गाँव में जहाँ पुरानी गलियों और कुँवारी हवेलियों के बीच में एक पुराना हवेला खड़ा था, वहाँ पर एक भूत रहता था। गाँव के लोग कहते थे कि वो हवेला रात के समय अद्भुत आवाज़ें बजाता और डरावनी दिखाई देता था। 

एक दिन, एक साहसी युवक नामक रवि गाँव में आया और वो भूत के बारे में सुनकर खुद को प्रतिस्थापित करने का निश्चय किया। रवि रात के समय हवेले में पहुंचा और वहाँ अपनी टॉर्च जलाई। तभी वह देखा कि एक पुराना आदमी एक किताब पढ़ रहा था। 

रवि ने देखा कि भूत केवल एक आत्मा था, जो अपनी पुरानी पसंदीदा किताब को पढ़ रहा था। वह भूत था क्योंकि वह अदृश्य था, लेकिन वह किसी को कोई चोट नहीं पहुंचा रहा था।

रवि ने भूत से बात की और उसकी दर की कहानी सुनी। भूत ने कहा कि वह अकेला है और सोच रहा है कि वह अपनी पसंदीदा किताब के साथ अमनपसंद रूप से रह सकता है।

रवि ने भूत के साथ मिलकर गाँव के लोगों को इस बारे में बताया और उन्होंने भूत को स्वागत किया। अब वह भूत और गाँव के लोग साथ में रहते हैं, और उनके बीच में एक अच्छी दोस्ती है।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि किसी की दिशा-निर्देशन और समय के साथ लोगों की सोच और दृष्टिकोण बदल सकते हैं, और दर की जगह दोस्ती और सहयोग का महत्व हो सकता है।

भुतहा अस्पताल के खौफनाक रासते से गुजरना पड़ा भारी

आज जो मै आपको किस्सा बताने जा रहा हु वो हमारे कस्बे के भूतहा अस्पताल का है | सारे कस्बे के लोग इस अस्पताल को भूतहा अस्पताल कहते है | इस अस्पताल का असली नाम विक्टोरिया अस्पताल है | इस अस्पताल को आज से करीबन 100 साल पहले अंग्रेजो ने बनवाया था | उस अस्पताल के सामने एक कब्रिस्तान है |


मेरे दादाजी ने मुझे बताया था कि आज से 60 साल पहले इस अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान एक लडकी की मौत हो गयी थी | तब से उस लडकी की आत्मा उस अस्पताल में भटकती है | रात ढलते ही कोई भी इन्सान उस रास्ते से नहीं गुजरता है क्यूंकि उस लडकी की आत्मा राहगीरों को परेशान करती है | हालंकि मै दादाजी की बताई पुरानी भूतहा कहानियों में ज्यादा विश्वास नहीं करता था |

एक रात मै अपने दो दोस्तों अंकित और राजू के साथ रात को बाइक पर घूम रहा था तभी मेरे एक दोस्त ने मुझसे विक्टोरिया अस्पताल वाले रास्ते से चलने को कहा | हम में से कोई भी ज्यादा भूत प्रेतों पर विश्वास नहीं करते थे और हमने उस रास्ते से जाने का पक्का किया | उस समय रात के 10 बज चुके थे | हम तीनो ने ये बात अपने परिवार वालो को नहीं बताने का वादा किया और उस रास्ते पर निकल पड़े | जैसे ही हम उस रास्ते से निकले रास्ते पर रेत होने की वजह से हमारी बाइक फिसल गयी और हम तीनो धडाम से बाइक से दूर गिर गए | गनीमत थी कि हम लोगो को कोई चोट नहीं आयी थी |बाइक चला रहे मेरे दोस्त अंकित ने बोला कि उसका बैलेंस तो बराबर था फिर ये बाइक कैसे फिसल गयी | हालंकि वो थोडा डर गया था तो मेरे दुसरे मित्र राजू ने बाइक चलाने को कहा |


अब राजू बाइक चला रहा था | हम 1 किमी ही चले थे कि अचानक हमारी गाडी का टायर पंचर हो गया और गाडी की स्पीड तेज़ होने से गाडी इस बार फिर पिछली बार से भी दूर तक फिसलती गयी | इस बार हमे कोहनियों और घुटनों पर थोड़ी चोट आयी थी | अंकित फिर से बोला कि इस जगह में जरुर कोई गडबड है हम लोग वापस उल्टे चलते है | लेकिन मैंने और राजू ने उसकी बात नहीं मानी और बाइक उठाकर पैदल चलना शुरू कर दिया|


हम थोड़ी दूर ही चले थे कि अचानक किसी लडकी के चीखने की आवाज़े सुनाई दी | ये सुनकर हम रुक गए और अंकित बोला “यार तुम लोगो को चीखने की आवाज़ सुनाई दी क्या ??” हमने उसकी बातो को अनसुना कर कहा कि कोई जानवर की आवाज़ होगी | पांच मिनट चलने के बाद फिर वोही चीख फिर से सुनाई दी | इस बार तो हम दोनों को भी थोडा डर लगने लगा | हम तीनो ने वापस चलने के बारे में सोचा लेकिन हम रास्ते के बीच में आ गये थे | पीछे चलने में 3 किमी और आगे चलने में 2 किमि ओर बाकी थे | हम लोगो ने आगे जाने का सोचा |

थोडा आगे चलने पर हमे बरगद के पेड़ के नीचे एक औरत दिखाई दी | इतनी रात को अकेली औरत को देखकर हमारे तो रौंगटे खड़े हो गये थे | हम लोगो ने पीछे मुड़ने का सोचा | तभी वो बुढी औरत चिल्लाई “बेटा रुको मुझे हाईवे तक का रास्ता बता दो ” | हमने पूछा कि “इतनी रात को आप इस रास्ते से कैसे निकल रही हो “| तो उस बुढिया ने कहा कि “मै पड़ोस के गाँव की रहने वाली और मेरे पास पैसे नहीं है इसलिए मै पैदल ही निकल पडी , हाईवे के उस पार मेरा गाँव है ” | हमने उस बुढिया की बात का विश्वास कर लिया और आगे निकल पड़े | रास्ते में वो बुढिया हमसे सारी बाते पूछने लगी | बुढिया हम तीनो के पीछे चल रही थी हम तीनो दोस्त अब अपनी बात कर रहे थे | तभी राजू बोला कि ” लो मांजी आपका रास्ता आ गया ” और वो जैसे ही पीछे मुड़ा तो वहा कोई नहीं था | हम तीनो की तो सिट्टी पिट्टी गुल हो गयी | हम बाइक को धक्का मारते हुए जोर से भागने लगे | भागते भागते अंकित ठोकर खाकर गिर गया और हमे जोर से चीखे सुनाई दी |हमने भी बाइक को वही पटककर अंकित को साथ लेकर दौड़ने लगे और अस्पताल के पास कब्रिस्तान तक पहुच गए |

ये सब घटित होते 12 बज चुकी थी | हम पसीने से तर बतर हो गए थे और कब्रिस्तान पार कर एक मंदिर में रुक गए क्यूंकि अगर बिना बाइक के घर जाते तो जूते पड़ते | इसलिए उस रात मंदिर में ही रुक गए और सुबह होते ही बाइक लेकर अपने अपने घर आ गये और घर वालो दोस्त के यहा रुकने का बहाना बना दिया | उस रात के बाद से हम उस रास्ते से कभी नहीं गए | मुझे आज भी सपनों में वो भूतिया बुढिया और चीखने की आवाज़े आती है |

धूनधर का जंगल कि पुरी कहानी

 भारत में कई भूतिया जंगल हैं, जो अकेलापन और अनपढ़ी ज़िन्दगी का प्रतीक हो सकते हैं। कुछ प्रमुख भुतिया जंगल हैं जैसे कि धूनधर का जंगल (मध्य प्...