एक रात की बात है, एक अकेला यात्री एक छोटे से गांव से गुजर रहा था। रात अधिक हो गई थी और वह एक अजनबी जगह में खो गया। उसने बहुत कोशिश की लेकिन वह रास्ता नहीं ढूंढ़ पा रहा था। उसे बहुत थकान महसूस हो रही थी और उसका मन डर से भर गया।
थोड़ी देर बाद, वह एक पुराने हावड़ा मंदिर के सामने पहुंचा। मंदिर की स्थिति बहुत डरावनी थी और रात की अंधकार में यह और भी भयानक लग रहा था। यात्री को डर सहन करने की क्षमता नहीं थी, लेकिन उसे एक आवाज सुनाई दी - "बच जाओ।"
यात्री को बहुत अजीब लगा, लेकिन वह सोचा कि शायद यह एक विचारात्मक गड़बड़ी हो सकती है। वह आगे बढ़ा और धीरे-धीरे मंदिर के अंदर चलने लगा।
मंदिर के अंदर, यात्री ने कुछ अजीब सी आवाजें सुनीं। रात की सनसनी और अंधेरे में वह बहुत घबराया और मंदिर से बाहर निकलने की कोशिश की। लेकिन जैसे ही वह बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, वह देखा कि मंदिर के पीछे एक विमानकारी आदमी खड़ा है जिसका चेहरा डरावना था और उसकी आँखें लाल थीं।
यात्री ने डर से चिल्लाया और मदद के लिए भागने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही वह चलने लगा, विमानकारी आदमी तेजी से उसकी ओर आया और उसे पकड़ लिया। यात्री ने मौत की चीख दी, लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए नहीं आया।
दौड़ते-दौड़ते, यात्री को एक अंधेरे कमरे में ले जाया गया जहां उसे ज़मीन पर बंद कर दिया गया। रूम की दीवारों पर लिखे हुए अक्षर पढ़ते हैं - "यहां आकर मत खो, अब तू हमारा हो गया।"
यात्री ने भयभीत होकर विमानकारी आदमी को पूछा, "तुम कौन हो?" विमानकारी आदमी ने दहाड़ते हुए कहा, "हम यहां अबाद हैं, और अब हम तेरे पीछे हैं।"
वहीं से कहानी बंद होती है। इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि कभी-कभी हमारे पीछे कुछ अद्भुत और डरावने चीज़ें हो सकती हैं जो हमें खातरा में डाल सकती हैं। हमें सतर्क रहना चाहिए और अपनी परिस्थितियों को ध्यान से समझना चाहिए, ताकि हम खुद को सुरक्षित रख सकें।
