एक बार की बात है, एक गाँव के पास एक लांबा और अंधेरा जंगल था। यह जंगल गाँव को शहर से जोड़ने वाले एक सुनसान सड़क के किनारे था, जिसका नाम "रास्ता भूत" था।
गाँववाले रात के समय उस सड़क पर नहीं जाते थे, क्योंकि कहानियों में कहा जाता था कि रात को रास्ते पर एक भयंकर साया घूमता रहता है। लोग कहते थे कि वह साया किसी को अपने जाल में फंसा देता है और फिर उसके साथ कुछ अनजाने और भयंकर चीखते-पुकारते साबित होते हैं।
एक दिन, गाँव के एक बहादुर लड़के नामक अर्जुन ने निश्चय किया कि वह इस रास्ते पर जाकर देखेगा कि यह साया सचमुच में मौजूद है या नहीं।
रात के समय, अर्जुन ने एक बड़ा बतखाना टॉर्च लिया और सड़क पर बढ़ा। सड़क पर पहुंचने पर उसने कुछ दिव्य चिन्हों को देखा और एक विशाल बर्फी साया के रूप में दिखाई दिया।
अर्जुन डरने का नाम नहीं लेता और धीरे-धीरे साया की ओर बढ़ता है। जब वह साया के पास पहुँचता है, तो वह देखता है कि वह साया एक वृक्ष की छाया में है और वह वृक्ष की छाया से आराम से सो रहा था।
इसके बाद, गाँव में फैले डर के बारे में एक सच्चाई का पता चलता है कि यह साया सचमुच में डरावना नहीं था, और गाँववाले अब रात को भी उस सड़क पर जा सकते हैं बिना किसी चिंता के।
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें अकेले दरावनी कहानियों और अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए, और हमें खुद जाकर सच्चाई की जाँच करनी चाहिए।